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मानव सेवा ही मधव सेवा

संक्षिप्त परिचय:-  धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, और सांस्कृतिक कार्यों को करने के उद्देश्य से एक संस्था के गठन का विचार वर्ष 1992 में मूर्त रूप ले सका। संस्था द्वारा सार्वजनिक दुर्गा पूजा उत्तर रेलवे सेवाग्राम कॉलोनी, चारबाग, लखनऊ में आयोजित किया गया। इस कार्य का संचालन संस्थापक ने उत्तर रेलवे के वाणिज्य परिवेक्षक पद पर रहते हुए अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए किया।

एक दिन शक्ति रूपी माँ ने स्वप्न में आकर कहा, “न मैं खाती हूँ, न मैं पहनती-ओढ़ती हूँ, मेरे आश्रय में आप और हम भोग करते हैं। अगर देवी की पूजा करनी है, तो सामाजिक व निर्धन लोगों और छात्र-छात्राओं को शैक्षिक व सांस्कृतिक कार्यों में अधिक से अधिक सहायता प्रदान करो।” इसी प्रेरणा से संस्था का गठन और पंजीकरण कराने का विचार उत्पन्न हुआ। अंततः वर्ष 2001 में मानव आदर्श सेवा समिति का पंजीकरण कराकर सेवा की भावना को साकार रूप दिया गया। इस संस्था का उद्देश्य मानव प्रवृत्ति के आदर्श, सकारात्मक और रचनात्मक सोच वाले व्यक्तियों को जोड़कर सेवा कार्य करना है।

संस्था का नाम और प्रतीक संस्था का नाम “मानव आदर्श सेवा समिति” (MANAV ADRASH SEWA SAMITI) रखा गया, जिसका अंग्रेज़ी संक्षिप्त नाम “MASS” है। इसका अर्थ है जन मानस के बीच कार्य करना। संस्था का लोगो धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है।

संस्था के कार्य और उद्देश्य

सामाजिक कार्य:

  • असाध्य रोगियों, नेत्रहीनों, अपाहिजों और विकलांगों के बीच भोजन सामग्री वितरण।
  • नशा उन्मूलन, रक्तदान, अंगदान और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन।
  • स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रम।
  • दाह संस्कार और उपकरणों की व्यवस्था।
  • जरूरतमंदों के लिए घर और अस्पताल में सेवा उपलब्ध कराना।
  • जीव-जंतु, पक्षी और जानवरों के लिए भोजन उपलब्ध कराना।

    धार्मिक कार्य:

  • नवरात्रि में दुर्गा उत्सव, देवी जागरण और कन्या पूजन का आयोजन।
  • मकर संक्रांति पर निर्धन लोगों को कंबल और वस्त्र वितरण।
  • ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल पर पूरे माह प्याऊ और प्रसाद वितरण।
  • दाह संस्कार में सहयोग और बुजुर्गों की सेवा।

शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्य:

  • छात्र-छात्राओं के लिए शैक्षिक कार्यक्रम, जैसे कला, सुलेख, सामान्य ज्ञान और मेहंदी प्रतियोगिताएं।
  • स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर युवा दिवस का आयोजन।
  • शहीदों की स्मृति में सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित करना।
  • बाल और शास्त्रीय संगीत व नृत्य कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए सांस्कृतिक मंच तैयार करना।
  • समाज में उत्कृष्ट कार्यों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान बढ़ाना।

संस्था का आय स्रोत:

  1. सदस्यता शुल्क।
  2. स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग।
  3. विज्ञापन और बैनर।
  4. कार्यक्रमों में सामग्री और अनुदान।
  5. संरक्षक और सलाहकार के सहयोग से।
  6. पुरस्कार और स्मृति चिन्ह के माध्यम से।

संस्था के सहयोगी और स्तंभ

  •  संस्था को दीर्घकालिक सफलता दिलाने में कई व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनमें प्रमुख नाम हैं:-      एस. के. सूर, स्व. ए. के. विश्वास. ए. सी. घोष, ए. सी. वर्मा, संजीव मिश्रा, स्व. श्रीमती पी. डी. चक्रवर्ती, रविन्द्र चक्रवर्ती, मुरलीधर आहुजा, रोहित अग्रवाल, श्याम भट्टाचार्जी, डॉ. उर्मी सरकार, लोकेश रस्तोगी, जयप्रकाश गोयल, स्व. श्रीमती रागनी द्विवेदी, दीलिप गुरनानी, स्व. श्रीमती रामा रे इत्यादि ।

संस्था का भविष्य और योजनाएँ

संस्था का उद्देश्य समाज में व्याप्त विषमताओं, रूढ़ियों और असमानताओं को दूर करना है। इसके लिए:

  • ऑनलाइन वेबसाइट की शुरुआत की योजना है।
  • निर्धन और निर्बल जनसंख्या को जागरूक करना।
  • समाज की जरूरतों के अनुसार स्वास्थ्य, कैटरिंग और अंतिम संस्कार से संबंधित सेवाएँ उपलब्ध कराना।
  • मानव, पशु और पक्षियों के लिए सेवा कार्य करना।

संस्था के विकास के लिए योग, निःस्वार्थ सेवाकार्य, विशेषज्ञों, लेखकों, योजनाकारों और आर्थिक सहयोगकर्ताओं की आवश्यकता है। हम सभी से आग्रह करते हैं कि सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में योगदान दें।

“ साँसे किराए की, शरीर मिट्टी का, तो अहम किस बात का।” आइए, सभी मानव एकजुट होकर सकारात्मक और रचनात्मक कार्य करें "